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Bhojpuri lover and web publisher

भोजपुरी पंचायत पत्रिका के बहाने भोजपुरी प्रकाशन पर चिन्तन

भोजपुरी स्वाभिमान के प्रतीक मासिक पत्रिका “भोजपुरी पंचायत” के अक्टूबर अंक के अगर राज ठाकरे पर केन्द्रित कहल जाव त बेजाँय ना कहाई. महाराष्ट्र केहु के बपौती ना ह, माफ करब असल मथैला ह “किसी की बपौती नहीं मुबंई” आ लेख हिन्दीए में बा, लेख आ अउरिओ ढेरहन सामग्री महाराष्ट्रे विवाद पर केन्द्रित बा.

एह पत्रिका के हर अंक हमरा के सोचे पर मजबूर कर देला कि का आगे चल के भोजपुरी के नियति इहे होखे वाला बा कि भोजपुरी के बात भोजपुरी छोड़ के हिन्दीए में कइल जाई? एह मुद्दा पर कवनो विरोध करे के जरूरत ना होखे के चाहीं काहे कि पत्रिका घोषित रूप से हिन्दी के पत्रिका हिय. अन्तर अतने बा कि एकरा प्रकाशन संपादन में भोजपुरी के खासमखास लोग शामिल बा. अब चाहे ऊ भोजपुरिया गुरू मनोज श्रीवास्तव होखी, मनोज भावुक होखीं, प्रभाकर पान्डेय, डा॰ रमाशंकर श्रीवास्तव भा खुद कुलदीप श्रीवास्तव होखसु. सभे लोग भोजपुरी ला समर्पित आ भोजपुरी में काम करे में आपन पहचान बना चुकल बा. एहमें से केहु के भोजपुरी प्रेम पर सवाल ना उठावल जा सके काहे कि ई लोग कवनो दिने भोजपुरी में काम करे वाला लोगन में अगुआ मानल जा सकेला. सवाल उठत बा कि अइसन कवन कारण बा कि भोजपुरी के कवनो पत्रिका एह तरह नियमित ना हो सकल, कुछ दिन ले निकलल फेर ओकरा के जम्हुआ छू दिहलसि?

एक बात त साफ लउकत बा कि पत्रिका का पीछे बड़हन हाथ बा जे चलते धन के कमी कतहीं नइखे झलकत. पत्रिका सुन्दर ढंग से साफ सुथर तरीका से समय पर प्रकाशित हो रहल बिया. बाकिर का खालिस भोजपुरी में अइसन कवनो पत्रिका प्रकाशन करे वाला हाथ ना मिल सके? जइसे कि भोजपुरिया गुरु मनोज श्रीवास्तव के पत्रिका भोजपुरी संसार आ बलिया से प्रकाशित होखे वाली पत्रिका पाती के अगर अइसन संरक्षक मिल जासु त सोना में सोहागा वाला बात होखी. पाती त देर सबेर त्रैमासिक रूप से छपत रहत बा, भोजपुरी संसार पत्रिका का बारे में ढेर दिन से कवनो जानकारी नइखे मिल पावत.

एक बात जवन हम महसूस कइले बानी तवन ई बा कि पत्रिका के प्रकाशक संपादक आ पत्रिका के संरक्षक का बीच जबले बढ़िया समन्वय ना बनी तबले कवनो पत्रिका ढेर दिन ले ना निकालल जा सकी. संरक्षक के आपन हित होला आ संपादक के आपन विचार. एह हित आ विचार का बीच के राह निकालल जरूरी बा.

तबले रउरा “भोजपुरी पंचायत के अक्टूबर अंक” के आनन्द लीं.

सीमा सिंह आ सोनू झा के आईटम डांस ‘अंतिम तांडव’ में

नंद किशोर फिल्मस एण्ड इंटरटेन्मेंट के बैनर तले बनत फिल्म ‘अंतिम तांडव’ में हॉट गर्ल सीमा सिंह संगे खलनायक सोनू झा के आईटम डांस नजर आई. मनोरंजन से भरपूर फिलिम में विराज भट्ट संगे सोनू झा के लड़ाई पहिला बेर फिलिमावल गइल बा.

‘अंतिम तांडव’ 5 अक्टूबर के बिहार में 60 थियेटरन में एके साथ रिलीज कइल जाई.

निर्देशक दिलीप शर्मा, प्रस्तुति झलकू शर्मा, लेखक राकेश त्रिपाठी, गीत राजेश मिश्रा, फणींदर राव, अशोक सिन्हा अउर जिया लाल यादव, संगीत छोटे बाबा, छायांकन देवेन्द तिवारी, नृत्य कानू मुखर्जी, संतोष सर्वदर्शी, मारधाड़ हीरा यादव, निर्माण प्रबन्धक आजाद झा, कार्यकारी निर्माता बद्री ठाकुर.

मुख्य कलाकार विराज भटट, शुभम तिवारी, स्मृति सिंहा, अनारा गुप्ता, जे. नीलम, विनोद मिश्रा, ललितेष झा, हीरा यादव, देव सिंह, रोहित सिंह, देव कुमार, संजीव स्वराज आ सोनू झा.

सहायक कलाकार राजीव झा, बद्री ठाकुर, प्रीति सिंह, सुनील वर्मा, सुभाष यादव, गौरव सिंह, टार्जन, शिवराज, कामरूल, धीरज मिश्रा, रविन्द्र नाथ गुप्ता, धरम, ओम कुमार, बम शंकर सेन, संदीप सावके, सुरेन्द्र मिश्रा. आयटम डांसर सीमा सिंह, संगी दूबे आ मेहमान कलाकार प्रिया शर्मा.


(स्रोत संजय भूषण पटियाला)

भोजपुरी फिलिम ‘अग्नि’ के संगीतमय मुहूर्त

अग्नि क्रिएशन के बैनर तले बने जात ‘अग्नि’ के संगीतमय मुहूर्त पिछला दिने चार बंगला, म्हाडा के स्वरलता रिकार्डिंग स्टूडियो में करावल गइल. एह मौका पर संगीतकार शत्रुघ्न के निर्देशन में गायिका वर्षा तिवारी के आवाज़ में एगो रोमांटिक गीत रिकार्ड भइल. वइसे एह फिल्म में आठ गो गाना बा जवना के गीतकार हउवें प्यारे लाल यादव आ गौतम. निर्देशक ए.एस. नाथन कथा आ पटकथो लिखले बाड़न. कोरियोग्राफर मुर्गन, एक्शन वाली तेजा आ कैमरामैन विलियम्स.

एह फिलिम ला मनोज पाण्डे, मनोज टाइगर आ अर्पिता माली के चयन हो गइल बा. नायिका आ बाकी कलाकारन के चुने के काम चलत बा.

फिल्म के बारे में निर्देशक ए.एस. नाथन बतवलन कि एगो एक्शन फिल्म ह जवना का जरिए नवहियन के एगो संदेशा दिहल जाई. एह फिलिम में पहिला बेर भोजपुरी में साउथ इंडियन स्टाइल के एक्शन देखे के मिली.

मुहुर्त पर बिरहा सम्राट अभिनेता विजय लाल यादव, दीपक भाटिया, बालेश्वर सिंह, गोपाल राय, धर्मेश, लल्लन सिंह, नूर कुरैशी, शिवांशु पाण्डे, अशोक जैन, दक्षिण भारत के ‘थीना ठंडी’ अखबार के पत्रकार दुरई आ अउरिओ खासमखास लोग मौजूद रहल.


(स्रोत समरजीत)

‘मोर्चाबन्दी’ पहिलका कॉपी बाहर आइल

रौनक क्रियेशंस आ सिल्वर स्क्रीन क्रिएशंस के फिल्म ‘मोर्चाबन्दी’ के पहिला कॉपी लैब से बाहर आ गइल बा. गीता श्रीवास्तव निर्मित एह फिल्म के लेखक, निर्देशक, गीतकार, आ संगीतकार संजय श्रीवास्तव. मुख्य कलाकार बाड़ें – मनोज टाईगर, राजीव दिनकर, श्रीकनकनी, प्रीति अउर रंजीव वर्मा.


(स्रोत शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा)

‘कालिया’ मुम्बई में 28 सितम्बर के रिलीज होखी

बिहार में धमाकेदार चउथा हफ्ता मनवला का बाद हैदर काजमी अभिनीत ‘कालिया’ अब मुम्बई में 28 सितम्बर के रिलीज होखी. निर्माता एएससी डिजिटल प्राईवेट लिमिटेड, सह निर्माता मुशर्रफ अहमद, सहायक निर्माता ए एच काजमी, लेखक आ निर्देशक शिवराम यादव, संवाद लेखक मनोज पाण्डे, गीतकार अरविंद तिवारी, संगीतकार अमन के. श्लोक, नृत्य निर्देशक एग्नेश, मारधाड़ रियाज सुल्तान, कैमरामैन मनीष के. जैन, ध्वनि मुद्रक सलीम खान, कला निर्देशक आशीष कोलते, संपादक गोविंद दुबे आ मुख्य कलाकार हउवें हैदर काजमी, अक्षरा सिंह, अनिल यादव, बिपिन सिंह, बालेश्वर सिंह, सी.पी. भट्ट, राकेश यादव, सुमंति बनर्जी, पूजा यादव, कृष्णा मुरारी, शैलेश सिंह राणा, सुषमा सिन्हा, निलोफर, राम मिश्रा, अलीशा अउर डांसिंग क्वीन सीमा सिंह.


(स्रोत शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा)

अंगरेजन का समय में त भोजपुरी के सम्मान मिलत लउकल बाकिर….

अंगरेजन का समय में त भोजपुरी के सम्मान मिलत लउकल बाकिर आजादी के बाद से एकर दसा ढंङ से गड़बड़ाइल ह.

गोरखपुर में भोजपुरी संगम के इकतिसवीं बइठकी के अध्यक्षता करत ई बाति डा॰ आद्या प्रसाद द्विवेदी जी कहलीं. उहाँ के एगो उदाहरन देत बतवलीं कि गोरखेपुर के रहे वाला मन्नन द्विवेदी गजपुरी जी भोजपुरी के सरवरिया भासा कहस. सन् १९२० में जब गजपुरी जी बलिया में कानूनगो रहलीं तब सरवरिया नाम के एगो पत्रिका निकालत रहीं जवन सन् १९३२ ले छपल. ओ घरी एह पत्रिका के आई॰सी॰एस॰ परीक्षा के पाठ्यक्रम में सामिल कइल गइल रहे. जेकरा कलक्टर बने के रहे ओकरा ई पत्रिका पढ़हीं के परत रहे काहें से कि एहमें से प्रश्न जरूर पुछाउ.

हर महिन्ना के दुसरका अतवार के होखे वाला गोरखपुर के भोजपुरी संगम के ई बइठकी एह बेर ओम धीरज जी के घरे भइल रहे. एकरा पहिला सत्र में “भासा के दिसाईं भोजपुरी के जतरा” बिसय पर चरचा भइल रहे.

बतकही शुरू करत मेजबान औम धीरज कहनीं कि अपनी कमाई के बड़ हिस्सा खरच क के हमनी का अपना लइकन के कानवेंटि संस्कार देहल में भिड़ल बानी जा आ एइजा बन्द कोठरी में बइठि के भोजपुरी पर भासनबुकाता. उहाँ के ईहो कहलीं कि आजु सगरी बोलियन के जो त भासा के दरजा दिआ जाव त जनगणना के टाइम पर हिन्दी के मातृभाषा कहे वाला केतना लोग बची आ तब राजभाषा आ राष्ट्रभाषा हिन्दी के का दसा होई?

भोजपुरी के हिन्दी के हिस्सा बतावत रुद्रदेव नारायण श्रीवास्तव बतवलीं कि धनी मनी इलाका के बोली भासा बन सकेली जइसे पंजाब.

रवीन्द्र श्रीवास्तव जुगानी जी भोजपुरी के जतरा कबीर से सुरु बतावत कहली कि दू किताब पढ़ के तिसरकी के रचना क देबेवाला साहित्यकारन से भोजपुरी के भला नइखे होखे के. उहाँ के कहलीं कि भोजपुरी मे अलिखित साहित्य के अकूत भंडार बा जवना के सहेजे खातिर कठिन परिश्रम के जरूरत बा. राष्ट्रभासा आ राजभासा के बहाना ले के भोजपुरी के विरोध करे वालन के जुगानी जी संविधान के आठवीं अनुसूची के अनुच्छेद ३४३ से ३५१ ले आ ३८४ निहारे के सुझाव दिहलीं, जवना में अंगरेजी के सब भारतीय भसन के विधिक निर्देशक जइसन बना दिहल बा.

बतकही में भागीदारी करत प्रो॰ जनार्दन जी समाज के उन्नति कातिर भोजपुरी भासा के उन्नति जरूरी बतावत कहलीं कि कवनो समाह से नजदीकी त तब्बे बनावल जा सकी जब ओकर भासा बोली जानत रही. हिंदी से जेकर रोटी चलि रहल बा ऊ भौजपुरी के विकास के खतरा बूझि रहल बा जबकि अइसन कवनो बाति नइखे.

प्रो॰ आर॰डीऌराय के विचार रहे कि कवनों बोली अपने समर्थ आ टिकाऊ साहित्य के बले भासा बनेले. भोजपुरी सेवी मनीसी लोग अइसन साहित्य दे देले बा लोग. अइसे त भासा हो गइला के बाद कविता, कहानी, उपन्यास आ नाटकन त प्रवाह बढ़िए जाला. प्रो॰ राय के कहे के हिसाब से भासा के दर्जा नाहियो दियइला पर भोजपुरी के दुनिया के नक्शा से मिटावल संभव नइखे.

एह बतकही में चरचा के समेटय सूर्यदेव पाठक पराग जी बतवलीं कि “भारत के भासा सर्वेक्षण” में सबसे पहिले सन १७८९ में डा॰ ग्रियर्सन एकरा खातिर भोजपुरिया आ भोजपुरी शब्द के प्रयोग कइलन. पराग जी बतवलीं कि भोजपुरी के पहिलका व्याकरण सारन जिला के कलक्टर जॉन बीम्स लिखले रहले. १८६७ में एह बोली के भासा कहत जऌन बीम्स एगो लेख लिखले जवना के एशिायटिक सोसाइटी में पढ़ल गइल रहे. उहे लेख १८६८ में ओह सोसाइटी के जर्नल में छपलो रहे.

बइठकी के दुसरे सत्र में ओम धीरज, रुद्रदेव नारायण, फूलचन्द गुप्त, त्रिलोकी तिवारी चंचरीक, हरिवंश शुक्ल हरीश, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, अरविन्द, आचार्य ओम प्रकाश पाण्डेय, धर्मदेव सिंह आतुर, राम सुधार सिंह, आ राजकुमार सिंह के काव्यपाठ भइल. श्रीधर मिश्र, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, अभिजीत शुक्ल, केशव पाठक सृजन, अंगद कुमार सिंहो चरचा में सामिल भइल लोग.

तिसवीं बइठकी

पिछला महीना के बइठकी १२ अगस्त २०१२ के मोहल्ला खरैया पोखरा, बशारतपुर में रवीन्द्र प्रताप सिंह जी के घरे भइल रहे जवना के अध्यक्षता प्रो॰ जनार्दन जी कइले रहीं.

बइठकी गिरिजाशंकर राय गिरिजेश, सूर्यदेव पाठक पराग, धर्मदेव सिंह आतुर, नरेन्द्र कुमार शर्मा, अवधेश शर्मा सेन, राजकुमार सिंह, ओम पाठक आ अंजू शर्मा जइसन कवियन आ साहित्यकारन से भरल पूरल रहल. भोजपुरी संगम के संरक्षक राजेश्वरो सिंह जी एह बइठकी में भागीदारी कइलीं. सभ केहू आपन आपन रचना आ विचर दीहल.


(गोरखपुर से सत्यनारायण मिश्र सत्तन के भेजल रपट)

कई गो बात जेपर कवनो बस ना चले

– जयंती पांडेय

हमनी के जीवन से कई गो बात सटल बा जेपर आदमी के आपन कवनो हक नइखे। जइसे आपन पड़ोसी, आपन माई बाप आ आपन नांव। ई बस हो जाला एकर चुनाव ना कइल जा सके। लेकिन आज के दुनिया में पहिलका दू गो बात त आपके अधिकार में नइखे लेकिन नांव पर अब हक बा। भदेस नांव बा त दन दे बदल दऽ। अखबारन में त नांव बदले के एगो कालमे खुल गइल बा। लेकिन एहु में एगो बड़ा आश्चर्यजनक बात बा कि नांव बदले वाला 98 प्रतिशत लोग मर्द ह, मेहरारू नांव बदलबे ना करऽ सन। मेहरारू नांव काहे ना बदलऽ सन ई एगो रिसर्च के विषय बा। नांव बदले में हमनी के नेतो लोग पीछे नइखे। उनकर नांव मशहूर हो गइल बा त लोग आपन नांव नइखे बदलत आ ई गोस्सा शहरन पर उतारऽता। अब देखऽ बम्बई के नांव मुम्बई हो गइल आ मद्रास चेन्नई हो गइल, बंगलोर पर तो रोज विवाद होला कि बंगलूर हऽ कि बंगलुरू। बंगाल बंगो हो गइल। अब देखऽ कि बंगाल के बाहर बंगाली डाक्टर बंगो डाक्टर हो जहिए सन आ बंगाली रसगुल्ला बंगो रसगुल्ला कहाए लागी आ बंगाल के जादू बंगो जादू हो जाई। अब कोलकाता जा त नया हरानी। ममता दीदी जब रेलमंत्री भइली त इहवां के मय मेट्रो रेल के स्टेशनन क नांव बदल दिहली। अब नांव हो गई उत्तम कुमार आ मास्टर दा वगैरह-वगैरह। एक इओर लोग दनादन नांव बदलऽता दोसरका इओर केहू के नांवे नइखे मिलत कि नाती पोता के का नांव दी। अरे दू चार शहर के टेलीफोन डायरेक्टरी मंगवा लेतऽ त बात बनि जाइत। कई बेर ढेर प्रचारित नावो से बड़हन प्राबलम हो जाला। अबहीं अण्णा के नांव चलल बा। कई गो मेहरारू अपना बेटन के नांव अण्णा ध दिहले बाड़ी सन। अब आगे जा के कवनो लइकी अण्णा से कइसे बियाह करी? काहे कि अण्णा के माने होला भइया। इहे ना नांव के ले के कई गो आउर प्राबलम बा। जइसे अलगू राम के बेटी सीता राम आ मनमोहन कृष्ण के बेटी राधा कृष्ण। अब ई नांव के कई गो मुस्टंडा मरद हमनी के गांव जेवार में भेंटा जाई आ उहे भके जे ई लोगन के ध लिहल त बीच बजार में जूता परे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

बतकुच्चन ‍ – ७८


ठाँवे-ठाँवे ठठ के ठठ लोग दोसरा के ठोकत-ठेठावत ठाँय-ठाँय करत ठाँव नइखे लेबे देत. संजोग बा दुर्योग से ओहू ठठ के नेता ठए धातु के हउवन स. अब ठए से ठठेरो होला, ठए से ठाकरे आ ठाकुरो होला. ठाकुर के कवनो खास जात ना होखे. बाभनो ठाकुर होला, क्षत्रिओ आ हज्जामो. कहे खातिर कहेला लोग कि नाम से पहिले ठाकुर ह त क्षत्रिय भा ब्राह्मन, नाम क बाद ठाकुर बा त भूमिहार भा हज्जाम. अब ई बात कतना साँच ह कतना झूठ हमरा नइखे मालूम. हमरा त आजु बस ठए से ठेठाए के बा. सामने वाला ठठाए लागे भा ठठाए. ठठाइल माने जोर से हँसल होला आ ठठावल माने दोसरा के पीटल-ठेठावल. एहीला हम दू बेर ठठाए के बात कहनी ह. अब रउरा ठठाए का जगहा ठठावल महसूस करीं त हमार कवन दोस? आदमी भा कवनो चीझु के समूह के ठठ कहल जाला. शान से रहला के ठाठ कहल जाला बाकिर बाँस-फूस से बनल देवालो के ठाठे कहल जाला. ठाँ, ठाँई, ठाँव के मतलब होला जगह. ठोकल-ठेठावल के मतलब साफे बा. जब केहू पर ठोकर मारल जाव त ओकरे के ठोकल कहल जाला. काँटी ठोकल जाला बाकिर बरतन के ठेठावल जाला. एह ठेठावे में ओकरा के एगो मनचाहा रूप देबे के कोशिश होला. एही से बनल बरतन बनावे वाला के ठठेरा कहल. जे ठोक-पीट के बरतन के सही रूप देला. आ आदमीओ के ठोके वाला इहे चाहेला कि ओकरा के अपना हिसाब से बना देव. इहे सोच के बापो महतारी अपना बचवन के ठोके-ठेठावेले. बाकिर दिक्कत तब होला जब एह ला ठाँव-कुठाँव ना देखे लोग. बिना ठठकल लोग ठनका जस गिरे लागेला. आसमान से गिरे वाला बिजली के ठनका कहल जाला. बाकिर जब आदमी कुछ सोच के ठनक जाव त ओह ठनकल के सावधान होखल कहल जाला. अइसहीं जब कुछ अनचाहा-अनायास हो जाव त आदमी ठिठक जाला, आ तब एकरा के ठठकल कहल जाला. खाली बरतन में जब कुछ डाल के आवाज निकालल जाव त कहल जाला कि ठनठनात बा. आ शायद एही चलते ठन-ठन गोपाल बनल, जे खाली-हाथ खाली-जेब होखे. अब देखीं कि आजु अतने कम जगहा में कतना कुछ ठाँस-ठूस दिहनी. ठाँसल-ठूँसल तब कहल जाला कि जब कम जगहा में बेसी कुछ घुसावल-अँटावल जाला. एही ठाँसल-ठूँसल का चलते नगर महानगर बन जाले सँ आ महानगरन में मुंबई के कवनो जबाब ना ह. मुंबई सही मामिला में मायानगरी हवे. अब ई माया धन के होखे भा पहचान के, सिनेमा के भा रोजगार के. एही माया से खिंचाइल लोग बिहारे-यूपी ना पूरा देश से महानगरन के रुख करेलें आ ई तब से चलत बा जबसे आदमी होश सम्हरले बा. आ आदमिए काहे, जीव-जनावर सगरी ओह दिसाईं रुख कर लेलें जहाँ कुछ भेंटाए के आस होखे. भेंटाइल जरूरी ना होला, आस जरूरी होला. केहु जा के ओहिजे रच बस गइल त दू-चार पुस्त का बाद ओहिजे के हो गइल. आ तब ओकरो बाद में आवे वाला मनई बाहरी बुझाए लागेला. ठीक ओही तरह जइसे रेल का डिब्बा में पहिले घुसल आदमी बाद में घुसे वाला के समुझावेला-धिरावेला कि पहिलहीं से साँसत में जान पड़ल बा तू कहाँ ठूकल आवत बाड़? मुंबईओ वइसने रेल के डब्बा ह. जहाँ “बाप के नाम साग पात बेटा के नाम परोरा” वाला बा. तीन पुस्त पहिले अइनी त हम मुंबईकर हो गइनी तूं काहे आवऽतार?

पिरितिया कबो टूटे ना के दुसरका शेड्युल

ब्वायज फिल्म के बैनर तले बनत भोजपुरी फिलिम “पिरितिया कबो टूटे ना” के दुसरका शेड्युल शनिचर का दिन से मुजफ्फरपुर के अलग-अलग लोकेशन पर शुरू भइल बा. प्रेमतिकोन पर आधारित एह फिल्म के कहानी में तीन गो लड़िका एकेगो लड़िकी के दिवाना हो गइल बाड़ें, एगो से दोस्ती, दोसरका से प्यार आ तिसरका से शादी! फेर एह तीनों के प्रेम कइसे बरकरार रहऽता, इहे एह फिलिम में देकावल गइल बा.

मुख्य भूमिका मे जानल मानल भोजपुरी गायक सकल बलमुआँ का साथे शांडिल्य इशान, मीली देबनाथ, नेहा गुप्ता, करण, आनंद मोहन, सुरेश भारती, अमान अली खान, सतीश सहनी, रंजना देसाई, संजय रजक वगैरह बाड़ें.

एह मे कुल बारह गो गीत बा जवनन के जितेन्द्र कुमार सुमन, सबा दरभंगवी, अनिल, अमीर हमजा, विनय निखील वगैरह लिखले बाड़न आ संगीत दिहले बाड़ें रंजन बाबला. छायांकन विजय जी के आ डांस डायरेक्शन शांडिल्य इशान के बा. निर्माता इब्रान खान आ निर्देशक जितेन्द्र कुमार सुमन हउवें. सहायक निर्देशक दीपांकर सिंह अउर एम के राणा बाड़ें.


(कुन्दन राज, 09835778058)

फेसबुको छाप लिहले बाड़ी सीमा सिंह

सिनेमा भोजपुरी के डांसिंग क्वीन सीमा सिंह अब फेसबुको छाप लिहले बाड़ी. भोजपुरी का संगही मराठी अउर बंगलो फिलिमन में काम करेवाली ई इस डांसिंग गुड़िया के जवने मराठी निर्माता अपना फिलिम में लिहलसि दुबारा उनुका के जरूर रिपीट करेला अपना फिलिम में. सीमा सिंह के पिछला चार बरीस से हर साल अवार्ड मिलल बा आ ऊ अनके अवार्ड हासिल कइले बाड़ी.


(शशिकांत सिंह रंजन सिन्हा)