बेरोजगारी के बारे में

By anjoria

आजु देश में बेरोजगारी के बारे में बतियावे वाला लोग के कमी नईखे. कमी बा तऽ ओह लोग के जे साँच कहि सको. ई कहि सको कि देश में बेरोजगार नईखन नालायक बाड़न जेकरा के नौकरी ना दिहल जा सके.
कवनो उद्यमी से पूछ के देख लिहीं, ऊ ईहे कही कि काम लायक आदमी नईखन भेंटात. हर उद्यमी, हर बिजनेसवाला परेशान बा कि ओकरा काम करे वाला आदमी भेंटा जाव.
जे चपरासियो बने लायक नईखे से मैनेजर के नौकरी खोजत बा. जे क्लर्को बने लायक से आईएएस के कम्पीटीशन में भाग लेत बा. जे सिपाहियो लायक नईखे से आईपीएस बने के सपना देखत बा. सपना देखे में कवनो हरजा नईखे. जवन सपना मन करे तवन देखीं. बाकिर बाद में ओह सपना के पूरा करे खातिर जवन लगन आ मेहनत जरूरी बा तवन कर के देखाईं.
पूर्वाञ्चल भा बिहार का भीतरी हिस्सा में चलि जाईं तऽ देखम कि जेकरा लिखहूँ ना आवे ऊ डाक्टरी कर रहल बाटे. आपरेशन कर रहल बाटे. हम ओकर समर्थन नईखीं करत बाकिर ई उदाहरण एह खातिर देत बानीं कि ऊ एगो सपना देखलसि कि डाक्टर बनब. पढ़ाई कर ना सकल रहुवे से कवनो डाक्टर का संगे काम करिके सीखलस. बाद में धीरे धीरे उनुकर सहायक बनल. आपरेशन में हाथ धोवे लागल. नजर डाक्टर साहब का अंगुरी पर, हर गतिविधि पर रखलसि. फेर एक दिन कवनो मौका देखि के कतहीं आपरेशन करे के शुरू करि दिहलसि. ऊ अपना सपना खातिर काम कईलस आ योग्यता ना रहला का बावजूदो अपना सपना के पूरा करि लिहलसि.
बाकिर अधिकतर लोग के देखम तऽ खाली सपना देखे वाला लोग भेंटाई. ओह लोग का लगे कबो खाली टाईम ना मिली कि ऊ कवनो काम खातिर ज्ञान अर्जित करि सको. खैनी बनावत, खात, दोस्तन का संगे ताश खेलत, चट्टी चौपाल पर बतकही करत आपन टाईम बरबाद करत रही लोग. पूछला पर कही लोग कि का करीं कतहीं कामे नईखे मिलत !
रउरो ओहीमें के त ना हईं ?
जवन काम बढ़िया लागत होखे तवने में भिड़ जाई. ओहीमें आपन योग्यता निखारत रहीं. याद राखीं
करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान,
रसरी आवत जात ते सिल पर पड़त निशान,
केहू पेटे में से योग्यता ले के ना आवे. ऐही दुनिया में अपना लगन इ मेहनत से सीखे के पड़ेला. संयोग से आपन देश अब पुरनका जमाना वाला सोशलिस्टपंथी नइखे रहि गईल. मुक्त अर्थव्यवस्था के राह पर चल निकलल बा. रउरा आजाद बानीं सपना देखे खअतिर आ फेर ओह सपना के पूरा करे के प्रयास करे खातिर.

राउर,
राठौर छपरहिया

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